यूपी के नौवें सीएम नारायण दत्त तिवारी का जीवन परिचय | Biography of UP's ninth CM Narayan Dutt Tiwari in Hindi

यूपी नाइन्थ सीएम नारायण दत्त तिवारी जीवन परिचय : जन्म,परिवार,शिक्षा,राजनीतिक सफर, सीएम कार्यकाल,मृत्यु

नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश के भारतीय कांग्रेस पार्टी के ऐसे नेता थे जो उत्तर प्रदेश के तीन बार और नौवें मुख्यमंत्री बने थे। जब भारत के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी थे तब उन्हें पहली बार राजीव गाँधी ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था। वे इंडियन नेशनल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ वे भारत के finance मिनिस्टर भी रहे थे। 

राजनैतिक जीवन में वे उतर प्रदेश को छोड़कर आँध्रप्रदेश के राजयपाल भी रहे थे। आईये जानते हैं नारायण दत्त तिवारी के जीवन परिचय, उनके राजनैतिक सफर और उनसे जुड़े राजनैतिक किस्सों के बारे में और उनके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए कितना कार्यकाल था।

                                                          

नारायण दत्त तिवारी का जन्म और परिवारिक जिन्दगी | Birth and family life of Narayan Dutt Tiwari

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 में उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित बलूती गांव में एक कुमाऊँनी ब्राह्मण में हुआ था। उनके पिता का नाम पूर्णानंद तिवारी था और वे वन विभाग में एक अधिकारी थे। उनका परिवार अर्थात उनके पिता जी पहले से ही भारत की आजादी के आंदोलन से जुड़े थे और आजादी की लड़ाई के लिए वे महात्मा गाँधी द्वारा चलाये असहयोग आंदोलन में कूद पड़े थे और उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

उनका परिवार उनके राजनीति में आने से पहले अच्छी आर्थिक स्थति रखता था। उनकी पहली शादी 1954 में 29 साल की उम्र में हुआ था। पर शादी के बाद उनकी पहली पत्नी का देहांत उनकी शादी के बाद 37 साल बाद उनकी पहली पत्नी जिनका नाम सुशीला था देहांत हो गया था। उन्होंने दूसरी शादी 88 साल की उम्र में 14 मई 2014 में की थी जिसका नाम उज्ज्ववाला तिवारी है। उनके बेटे का नाम शेखर तिवारी था।

नारायण दत्त तिवारी की शिक्षा और शिक्षा के दौरान राजनीति | Politics during education of Narayan Dutt Tiwari

नारायण दत्त तिवारी ने विभिन्न स्कूलों से अपनी शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने एम.बी. स्कूल, हल्द्वानी, ईएम हाई स्कूल, बरेली और सी.आर.एस.टी. हाई स्कूल, नैनीताल से एजुकेशन ग्रहण की थी। उनकी राजनीति में शुरुआत तब हो गई जब वे मात्र 17 साल के थे और उन्हें भारत छोड़ो अंदोलन में भाग लेने पर 1942 में जेल भी जाना पड़ा था। 

उन्होंने ब्रिटिश नीतियों का विरोध 1942 में किया था और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में पुर जोर भाग लिया था जसके बाद उन्हें उनके पिता के साथ जेल भेजा गया था। 1944 में 15 महीने के बाद रिहा होने पर, उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जहां उन्होंने एम.ए. (राजनीति विज्ञान) में विश्वविद्यालय में टॉप किया; उन्होंने उसी विश्वविद्यालय से एलएलबी के साथ अपनी शिक्षा जारी रखी, और 1947 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चुने गए।


नारायण दत्त तिवारी की दूसरी शादी  और पत्नी | Narayan Dutt Tiwari's second marriage and wife


नारायण दत्त तिवारी की दूसरी शादी उज्ज्वला तिवारी से हुई थी जो नारायण दत्त तिवारी से तीस साल छोटी थी। उज्ज्वला तिवारी के पिता जी का नाम शेर सिंह था जो प्रोफेसर और प्रमुख नेता थे। उज्ज्वला तिवारी के पिता मोरार जी देसाई के मंत्रिमंडल में और इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में भी मंत्री रहे थे। उज्जवला और उनके पति सिद्धार्थ के जन्म के कुछ समय बाद ही अलग हो गए, लेकिन उन्होंने 2006 तक तलाक नहीं लिया। उज्जवला और तिवारी पहली बार 1968 में उनकी शादी से पहले मिले थे, लेकिन

उनका अफेयर 1977 के आसपास चल पड़ा और रोहित शेखर का जन्म हुआ। तिवारी की शादी निःसंतान थी और उनकी पत्नी सुशीला तिवारी की शादी के 40 साल बाद 1991 में कैंसर से मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद तिवारी ने 88 साल की उम्र में उज्ज्वला तिवारी से शादी की थी।


नौवें सीएम नारायण दत्त तिवारी का राजनीतिक सफर | Political Journey of Narayan Dutt Tiwari

नारायण दत्त तिवारी1952 में उत्तर प्रदेश विधान सभा के लिए स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश में पहले चुनाव में, वे नैनीताल निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर पहली बार विधायक बने। दूसरी बार वे फिर इसी निर्वाचन क्षेत्र से दूसरी बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से इलेक्शन लड़े और उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा।

1963 में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को छोड़ दिया और पंडित जवालाल नेहरू के प्रधानमंत्री कार्यकाल में इंडियन नेशनल कॉग्रेस में शामिल हो गए। 1965 में उन्होंने इंडियन नेशनल कॉग्रेस के उमीदवार बनकर उत्तर प्रदेश के काशीपुर विधानसभा से इलेक्शन लड़े और M. L. A चुने गए। इस बार उन्हें उत्तर प्रदेश की विधासभा में मंत्री पद दिया गया।

1979 में जब भारत के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह थे तब चौधरी चरण सिंह ने अपनी सरकार में उन्हें वित्त और संसदीय कार्य मंत्री नियुक्त किया। नारायण दत्त तिवारी 1980 में 7 वीं लोकसभा के लिए चुने गए और इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडल में शामिल हो गए और केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद भारत में राजीव गाँधी भारत के प्रधानमंत्री बने तब उन्हें राज्य सभा का सदस्य बनाया गया और वे 1985 से 1988 तक उत्तर प्रदेश के लिए राज्य सभा के सदस्य बने।

1985 और 1988 के बीच उन्हें तीन बार मंत्री बनाया गया। पहली बार उन्हें 1985 में पेट्रोलियम मंत्री का कार्यभार शोपा गया और दूसरी बार 1986 में से लेकर 1987 तक भारत का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। 1988 में उन्हें वाणिज्य मंत्री नियुक्त किया गया।

नारायण दत्त तिवारी का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल | Narayan Dutt Tiwari's tenure as Chief Minister of Uttar Pradesh

नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री बने। उनका पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल 21 जनवरी 1976 में शुरू हुआ था जब वे काशीपुर से इलेक्शन लड़ कर उत्तर प्रदेश विधासभा में आये थे। जब वे पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी थे इंदिरा गाँधी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में सहयोग दिया था। उनका पहला मुख्यमंत्री का कार्यकाल 21 जनवरी से लेकर 30 अप्रैल 1977 तक एक साल और 99 दिन का रहा था। दूसरी बार वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री 3 अगस्त 1984 में बने जब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ही थे।

उनका उत्तर प्रदेश के रूप में ये कार्यकाल 3 अगस्त 1984 से लेकर 10 मार्च 1985 तक का रहा था जो एक साल और 52 दिन का था। तीसरी बार नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री 25 जून 1988 में बने जब भारत में राजीव गाँधी की सरकार थी। ये कार्यकाल उनका 25 जून 1988 से लेकर 5 दिसंबर 1989 तक एक साल और 163 दिन का रहा था। इसके इलावा उत्तर प्रदेश को छोड़कर उत्तराखण्ड उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद वे उत्तराखण्ड के भी 2002 से लेकर 2007 तक मुख्यमंत्री रहे।

कैसे कब और कहां हुई थी नारायण दत्त तिवारी की मृत्यु :-


नारायण दत्त तिवारी देहांत लम्बे समय मल्टीपल ऑर्गन फैल होने की वजह से बीमार चल रहे थे इस लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया पर 18 अक्टूबर 2018 उन्होंने अंतिम साँस ली जब उनकी उम्र पूरी 93 वर्ष की थी। उनकी मृत्यु और जन्म तारीख एक ही 18 अक्टूबर थी। उनके देहांत पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दुःख जताया था। 




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