यूपी के दसवें सीएम थे राम नरेश यादव जानिए उनके जीवन परिचय के बारे में | Ram Naresh Yadav was the tenth CM of UP, know about his biography in Hindi
राम नरेश यादव बायोग्राफी :जन्म, परिवार,शिक्षा,राजनीतिक जीवन,सीएम कार्यकाल,देहांत
राम नरेश यादव की जीवनी :- उत्तर प्रदेश में पांचवें राष्ट्रपति शासन के बाद राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे जो उत्तर प्रदेश के दसवें सीएम थे। वे उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और उत्तर प्रदेश के एक नेता और मुख्यमंत्री थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले वे उत्तर प्रदेश में आज़म गढ़ में एक वकील के रूप में काम करते थे।पहले वे जनता पार्टी राजनैतिक पार्टी में थे पर बाद में उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। आइये जानते हैं उत्तर प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव के जीवन परिचय, उनके राजनीतिक जीवन और उनके मुख्यमंत्री के कार्यकाल के ऊपर,राम नरेश यादव का व्यक्तित्व कैसा था।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1928 में उत्तर प्रदेश के आज़म गढ़ जिले में आँधीपुर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता जी का नाम गया प्रसाद जो पेशे से एक अध्यापक थे और एक मध्यवर्गीय परिवार से सबंध रखते थे। उनकी माता जी का नाम भागवन्ती देवी था जो एक धर्मनिष्ठ और एक घरेलू स्त्री थी। उनकी शादी अनारी देवी निक नाम शांति देवी के साथ 1949 में 21 वर्ष की उम्र में हुआ था। शादी बाद उनकी आठ संतानें हुई थी जिनमे तीन बेटे और पांच बेटियां थी।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री की शुरू की शिक्षा अर्थात प्राइमरी की शिक्षा उनके पैतृक गांव से शुरू हुई थी। मिड्ल स्कूल की शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने हाई स्कूल आजमगढ़ में जो एक सरकारी स्कूल था शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद वाराणसी कॉलेज में दाखिला लिया और यहां से स्नातक की डिग्र्री प्राप्त की। इस कॉलेज से MA करने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। कानून की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के आज़म ग्रह जिले से एक वकील के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की।
राम नरेश यादव पर कॉलेज के समय उस वक्त के मशहूर समाजवादी चिंतक मदनमोहन मालवीय का बहुत प्रभाव था। शिक्षा के दौरान वे एक धार्मिक विचार के इंसान थे और हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रन्थ गीता का अध्ययन करते रहते थे। इसके इलावा उनके जीवन पर डॉक्टर राधाकृष्णनन के विचारों का बहुत प्रभाव था जो भारत के राष्ट्रपति भी थे। उनके पिता जी ने उन्हें बचपन से ही उन्हें सच्ची भावना से जीने के लिए प्रोत्साहित किया था।
उनके पिता जी महात्मा गाँधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू की नीतियों से प्रभावित थे पर राम नरेश यादव जब मुख्यमंत्री 1977 में बने तब भारत में एक राजनैतिक उथल पुथल हुई जब इंदिरा गाँधी ने उत्तर प्रदेश में नहीं पुरे भारत में आपातकाल लगाया था और सभी नेताओं को जेल में डाल दिया था। 1977 की इस घटना के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली थी और इंडियन नेशनल कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया था।
दूसरा उदाहरण उनकी साफ छवि का तब सामने आया था जब वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक रिक्शे से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे थे ये ही नहीं जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहे अर्थात जब उन्हें इस्तीफा दिया था तब भी वे एक रिक्शे से राजभवन से घर पहुंचे थे। गौरतलब है वे पूर्व प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के बहुत करीबी थे और उनके प्रयासों से ही वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनकी स्वच्छ छवि के कारण उस वक्त ही नहीं आज भी उन्हें उत्तर प्रदेश में बाबू जी के नाम से जाना जाता है।
उनकी राजनैतिक जीवन में एक बदलाव फिर आया था जब उन्होंने 1989 में कांग्रेस पार्टी छोड़ कर राजीव गाँधी के समय कांग्रेस पार्टी ज्वाइन क्र ली थी। इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद वे 1985 से 1988 तक उत्तर प्रदेश के शिकोहा विधानसभा क्षेत्र से चुने गए इस कोंस्टीटूएंसी से विधायक रहे। 1996 से लेकर 2007 तक वे उत्तर प्रदेश के फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। उनके राजनैतिक सफर का अंतिम चरण तब था जब उन्हें 2011 में मध्यप्रदेश राज्य का राज्य पाल नियुक्त किया गया था जब भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह थे।
राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश में 1977 एमर्जेन्सी के खत्म होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। 1977 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा सभा इलेक्शन हुए और भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत हासिल की थी जब भारतीय जनता पार्टी को 425 में से 352 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। राम नरेश यादव को 23 जून 1977 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था और उनका उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल 23 जून 1977 से लेकर 27 फरवरी 1979 तक का रहा था जो एक साल और 249 दिन का रहा था।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है की राम नरेश यादव का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल दो साल का भी पूरा नहीं था पर उन्होंने इस पद रहते हुए कई सराहनीय काम किये उन्होंने उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के प्रयास किये। इसके इलावा राम नरेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किये। उत्तर प्रदेश के सामाजिक ढांचे को ऊपर उठाते ह्यूए पिछड़े समाज के लिए उन्होंने सराहनीय काम किये। उन्होंने उत्तर प्रदेश में अन्तोदय योजना का आरम्भ किया।
26 अगस्त 2011 में राम नरेश यादव को यूपीए सरकार की सिफारिश पर भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। पर ठीक चार साल बाद उनके ऊपर मध्यप्रदेश में फारेस्ट गॉर्ड की भर्ती के बीच गड़बड़ी का आरोप लगा। उन पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
![]() |
| राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के 10 वे मुख्यमंत्री |
राम नरेश यादव जन्म, परिवार और शिक्षा | Ram Naresh Yadav Birth, Family and Education
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री की शुरू की शिक्षा अर्थात प्राइमरी की शिक्षा उनके पैतृक गांव से शुरू हुई थी। मिड्ल स्कूल की शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने हाई स्कूल आजमगढ़ में जो एक सरकारी स्कूल था शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद वाराणसी कॉलेज में दाखिला लिया और यहां से स्नातक की डिग्र्री प्राप्त की। इस कॉलेज से MA करने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। कानून की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के आज़म ग्रह जिले से एक वकील के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की।
राम नरेश यादव का स्वच्छ व्यक्तित्व | Ram Naresh Yadav a good Personality
उनके पिता जी महात्मा गाँधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू की नीतियों से प्रभावित थे पर राम नरेश यादव जब मुख्यमंत्री 1977 में बने तब भारत में एक राजनैतिक उथल पुथल हुई जब इंदिरा गाँधी ने उत्तर प्रदेश में नहीं पुरे भारत में आपातकाल लगाया था और सभी नेताओं को जेल में डाल दिया था। 1977 की इस घटना के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली थी और इंडियन नेशनल कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया था।
दूसरा उदाहरण उनकी साफ छवि का तब सामने आया था जब वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक रिक्शे से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे थे ये ही नहीं जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहे अर्थात जब उन्हें इस्तीफा दिया था तब भी वे एक रिक्शे से राजभवन से घर पहुंचे थे। गौरतलब है वे पूर्व प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के बहुत करीबी थे और उनके प्रयासों से ही वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनकी स्वच्छ छवि के कारण उस वक्त ही नहीं आज भी उन्हें उत्तर प्रदेश में बाबू जी के नाम से जाना जाता है।
राम नरेश यादव का राजनैतिक जीवन | Political life of Ram Naresh Yadav
राम नरेश यादव का राजनैतिक जीवन 1977 में शुरू शुरू हुआ था जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के आज़म गढ़ लोकसभा से इलेक्शन जीते थे और 6th लोकसभा इलेक्शन के बाद वे इसी वर्ष 1977 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने जब भारत के प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई थे। इसके इलावा उन्होंने 1988 में भारतीय संसद की उच्च सदन राज्य सभा का भी प्रतिनिधित्व किया।उनकी राजनैतिक जीवन में एक बदलाव फिर आया था जब उन्होंने 1989 में कांग्रेस पार्टी छोड़ कर राजीव गाँधी के समय कांग्रेस पार्टी ज्वाइन क्र ली थी। इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद वे 1985 से 1988 तक उत्तर प्रदेश के शिकोहा विधानसभा क्षेत्र से चुने गए इस कोंस्टीटूएंसी से विधायक रहे। 1996 से लेकर 2007 तक वे उत्तर प्रदेश के फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। उनके राजनैतिक सफर का अंतिम चरण तब था जब उन्हें 2011 में मध्यप्रदेश राज्य का राज्य पाल नियुक्त किया गया था जब भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह थे।
राम नरेश यादव का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल | Ram Naresh Yadav's tenure as Chief Minister of Uttar Pradesh
राम नरेश यादव द्वारा मुखमंत्री पद पर किये काम :-
राम नरेश यादव पर घोटाले का आरोप :-
यादव ने संवैधानिक छूट का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने बाद में अप्रैल में एसटीएफ को "पूर्ण प्रोटोकॉल का पालन करने" के लिए कहा, राज्यपाल राज्य के प्रमुख थे। सिट (sit) ने उनपर 2016 में उनके कार्यकाल ख़त्म होने के बाद उनपर कार्यवाही का हवाला दिया। उनपर 24 फरवरी 2015 में भर्ती से सबंधित एफ आई आर दर्ज की गई थी।
राम नरेश यादव 2016 में लगभग 88 साल के हो गए थे। इससे पहले वे लम्बी बीमारी से पीड़ित थे। उन्हें बीमारी पर रिकवर करने के लिए उत्तर प्रदेश के लखनऊ में संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती करवाया गया था पर 22 नवंबरसन 2016 में 88 वर्ष की उम्र में लम्बी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें