त्रिभुवन नारायण सिंह के बाद कमलापति त्रिपाठी बने थे यूपी के सातवें सीएम जानिए उनके व्यक्तित्व के बारे में | Kamlapati Tripathi became the seventh CM of UP after Tribhuvan Narayan Singh, know about his personality

कमलापति त्रिपाठी जीवन परिचय, इतिहास 

यूपी के छठे सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह बाद कमलापति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के इंडियन नेशनल कांग्रेस के एक सीनियर नेता थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री का पद संभाला था। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री 1971 में बने। कमलापति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं थे पर इससे पहले आजादी के गुलाटी भी थे जिन्होंने भारत में आजादी के समय चले आंदोलन जैसे असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया। एक नेता होने के साथ -साथ हिंदी साहित्य में भी उनका योगदान अग्रणी और सराहनीय था। आइये जानते हैं यूपी के छठे सीएम कमलापति त्रिपाठी के जीवन परिचय और उनके राजनैतिक जीवन के बारे में कैसी थी उनकी पर्सनालिटी। 

                                     

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी का जन्म, परिवार | Former Uttar Pradesh Chief Minister Kamalapati Tripathi's birth, family

कमलापति त्रिपाठी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में 3 सितम्बर 1905 में हुआ था। उनके पिता जी का नाम पंडित नारायणपति त्रिपाठी था जो त्रिपाठी परिवार से संबंधित थे। उनका परिवार भी औरंगज़ेब के अत्याचारों का शिकार हुआ था इसलिए कमलापति त्रिपाठी के पूर्वज उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आकर बस गए थे। घर की परिस्थतियों की वजह से कमलापति त्रिपाठी का विवाह छोटी उम्र में 19 साल में हो गया था। कमलापति त्रिपाठी के पांच बच्चे थे जिनमे तीन बेटे और दो बेटियां थी।

तीनो बेटे आगे चलकर राजनीति में आये और उनका राजनीति में कहीं न कहीं योगदान रहा। उनके सबसे बड़े बेटे का नाम लोकपति त्रिपाठी था जो उत्तर प्रदेश की राजनीती में मंत्री पद पर भी रह चुके हैं। दूसरे बेटे का नाम मायापाति त्रिपाठी है जो राजनीति में तो नहीं पर समाज सेवा के लिए जाने जाते हैं और भारतीय किसान और मजदूर संघ के लिए उनके काम सराहनीय हैं। उनेक सबसे छोटे बेटे का नाम शशिपति त्रिपाठी हैं और वे आज नेता के रूप में काम करते है।

उत्तर प्रदेश के सातवें सीएम कमलापति त्रिपाठी का राजनैतिक कैरियर | Political career of Kamalapati Tripathi

महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए 1921 के असहयोग आंदोलन के दौरान कमलापति त्रिपाठी ने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। वह सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी सक्रिय भागीदार थे, जिसके लिए उन्हें जेल हुई थी। 1942 में वे भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के लिए मुंबई जा रहे थे, जब उन्हें गिरफ्तार किया गया और 3 साल की जेल हुई। कमलापति त्रिपाठी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर संयुक्त प्रांत से संविधान सभा के लिए चुने गए और उन्होंने भारत के संविधान के प्रारूपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कमलापति त्रिपाठी ने वर्ष 1952 में सूचना और सिंचाई मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने वर्ष 1957 में गृह, शिक्षा और सूचना विभाग के मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने वर्ष 1962 में वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। उसके बाद वे उपमुख्यमंत्री बने। उन्होंने वर्ष 1971 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दो साल और 69 दिन के लिए काम किया। वे उत्तर प्रदेश के 4 अप्रैल 1971 में मुख्यमंत्री बने और और उनका उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल 2 साल और 69 दिन तक रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद वे 1973 से लेकर 1980 तक राज्य सभा के सदस्य चुने गए। 1980 में उन्होने लोकसभा का चुनाव लड़ा और पांच साल के लिए 1980 से 1984 तक लोकसभा के सदस्य रहे। जब भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी थी तो वे रेल मंत्री रहे और उन्होंने रेल मंत्री के रूप में कई सराहनीय काम किये।

कमलापति त्रिपाठी दो बार भारत के रेल मंत्री रहे पहले 1975 से 1977 तक और दूसरी बार 1980 में। वे भारत के ऐसे रेल मंत्री रहे हैं जिन्होंने चार बार रेल वजट पेश किया था। अपने रेल मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने लगभग 6 ट्रेनों की शुरुआत कई थी जिनमे,,साबरमती एक्सप्रेस, गंगा कावेरी एक्सप्रेस, नीलांबरी एक्सप्रेस, वाराणसी एक्सप्रेस (दिल्ली-लखनऊ एक्सप्रेस विस्तारित), तमिलनाडु एक्सप्रेस और काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस प्रमुख हैं।

कमलापति त्रिपाठी की मृत्यु  | Death

कमलापति त्रिपाठी जब लगभग 85 साल के थे तो आठ अक्टूबर 1990 में उनकी मृत्यु हो गई। आज भी उत्तर प्रदेश में उन्हें एक मुख्यमंत्री के रूप मेंयाद किया जाता है। जब कमला पति त्रिपाठी की मृत्यु हुई तब भारत के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह और राष्ट्रपति आर वेंकटरमण थे भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति उनकी मौत पर शोक जताया था।



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