जानिए उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता के जीवन परिचय के बारे में | Know about the life introduction of Chandra Bhanu Gupta, the third Chief Minister of Uttar Pradesh

चंद्र भानु गुप्ता थर्ड सीएम उत्तर प्रदेश : जन्म,शिक्षा, राजनीति, कार्यकाल, योगदान,मृत्यु 

डॉक्टर समूर्णानन्द जी के बाद चंद्र भानु गुप्ता उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन बार मुख्यमंत्री पद के लिए अपना कार्यकाल पूरा किया था। चंद्र भानु गुप्ता उत्तर प्रदेश के ऐसे मुख्यमंत्री थे जो उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री समूर्णानद जी के बाद पहली बार मुख्यमंत्री बने उनके बाद दूसरे कार्यकाल के लिए सुचेता कृपलानी के बाद और तीसरा कार्यकाल उन्होंने चौधरी चरण सिंह के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश के मुखमंत्री का पद संभाला आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता के जीवन परिचय, इतिहास, मुख्यमंत्री कार्यकाल और उनके जीवन पर उनका जीवन काल का सफर केसा था।

                                                  

चंद्र भानु गुप्ता, जन्म शिक्षा  | Chandra Bhanu Gupta, Birth Education

उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के अतरौली में हुआ था। चंद्र भानु गुप्ता की शिक्षा उनके पैतृक गांव में ही पूरी हुई थी और अपनी प्राम्भिक शिक्षा के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की थी।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता का आजादी में योगदान :-

चंद्र भानु गुप्ता का परिवार एक साफ छवि के लिए जाना जाता था इसलिए चंद्र भानु गुप्ता भी एक ईमानदार किस्म के इंसान थे। बचपन से वे आजादी की लड़ाई के लिए योगदान के लिए जाने जाते हैं। चंद्र भानु गुप्ता मात्र जब 17 साल के थे तो उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपने कदम पसार लिए थे। देश में 1919 जैसे अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाये गए रॉलेट एक्ट के विरुद्ध उन्होंने आवाज उठाई थी। अपनी सुध छवि के कारण चंद्र भानु गुप्ता को इंडियन नेशनल कॉग्रेस ने पहचान लिया था इसलिए 1929 में उन्हें कॉग्रेस पार्टी के लिए अध्यक्ष पद के लिए चुना गया।

पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता का राजनैतिक करियर और कार्यकाल | Political career and tenure of former Chief Minister Chandrabhanu Gupta


भारत की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा के पहले चुनाव हुए इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में इंडियन नेशनल कांग्रेस को बहुमत प्राप्त हुआ और गोविन्द बलभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। चंद्रभानु गुप्‍ता ने आजादी के बाद अपना राजनैतिक करियर यहाँ से शुरू किया था। इन चुनावों में चंद्रभानु गुप्‍ता ने पहला M. L. A चुनाव जनसंघ पार्टी के उमीदवार के विरुद्ध लड़ा था और उन्होंने ये इलेक्शन जीत लिए थे। लेकिन 1957 में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा और वे समाजवादी पार्टी के उमीदवार से हार गए थे।

1962 में फिर से उत्तर प्रदेश के रानीखेत विधानसभा से उन्होंने इलेक्शन लड़ा और इलेक्शन जीत गए। वे 14 मार्च 1962 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 1963 तक रहा। 1967 में उत्तर प्रदेश की विधानसभा के लिए फिर वे विधायक चुने गए और उन्होंने रानीखेत से इलेक्शन जीता और फिर से दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए दूसरे कार्यकाल के लये सामने आये पर ऐसा हिअ कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का वह उनका सबसे कम कार्यकाल था और आज तक भी उनका सबसे कम कार्यकाल है जब वे केवल 14 मार्च से 1967 से लेकर 2 अप्रैल 1967 के लिए केवल 19 दिन के लिए मुख्यंमत्री चुने गए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता का तीसरा मुख्यमंत्री कार्यकाल 26 फरवरी से शुरू हुआ था और उनका कुल कार्यकाल 17 फरवरी 1970 तक का ये कार्यकाल भी केवल 356 दिन के लिए रहा। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता के कार्यकाल की बात करें तो वे तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने पर लम्बे समय के लिए अर्थात पांच साल का कार्यकाल एक बार भी पूरा नहीं कर पाए।

चंद्रभानु गुप्‍ता की व्यक्तित्व की झलक और कुछ दिलचस्प किस्से | Glimpse of personality of Chandrabhanu Gupta

उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता एक साफ छवि वाले व्यक्ति थे। उनकी ईमानदारी और उनकी साफ छवि का उदाहरण तब सामने आय था जब उनका देहांत हुआ ऐसा माना जाता है कि जब उनकी मृत्यु हुई थी तो उनके बैंक अकाउंट में केवल 10000 रूपये की राशि ही मिली थी जो उनके वयक्तित्व को दर्शाता है।

कुछ राजनैतिक एक्सपर्ट ऐसा मानते हैं कि चंद्रभानु गुप्‍ता तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों में लोकप्रिय हो चुके थे इसलिए उनकी लोकप्रियता को देखते हुए इडियन नॅशनल कोंग्रेस के लीडर भारत के पहले प्रधानमंत्री पडित नेहरू ने उन्हें आगे नहीं बढ़ाया था और बार बार उनके कार्यकाल पर फुल स्टॉप लगा था।

इन्ही करणों से पहले कार्यकाल को ख़त्म क्र चौधरी चरण सिंह को मुखयमंत्री बनाया गया और दूसरी बार उनका कार्यकाल तीन साल का पूरा नहीं होने दिया और सुचेता कृपलानी को उत्तर प्रदेश का मुख्यंमत्री बनाया गया था। उनके कम कार्यकाल से पता चलता है वे एक साफ छवि वाले इंसान थे और इन्ही कारणों से वे आगे नहीं पढ़ पाए।

उनकी साफ छवि का इस बात से भी पता चलता है जब ऐसा माना जाता है की उनके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए एक बार उत्तर प्रदेश में गोमती नदी में बाढ़ आ गयी थी और ये बाढ़ बांध के टूटने की वजह से आई थी तब चंद्र भानु गुप्ता ने अपनी लोकप्रियता और अपने सी एम् पद को और भी सुदृढ़ किया जब उन्होंने इस बाढ़ का जायजा लिया और वहां पर तब तक बैठे रहे जब तक वह बांध ठीक नहीं हो जाता।

पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता बने थे M. L. A  बनने से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री :-

वरिष्ठ पत्रकार बाबू राम त्रिपाठी के अनुसार 1958 में जब उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की मौदहा विधानसभा सीट के लिए उप चुनाव होने थे तो चंद्रभानु गुप्‍ता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके थे। चंद्रभानु गुप्‍ता को किसी भी पद के लिए चुनाव जितना जरूरी था। इस सीट पर विराजमान उस वक्त के विधायक ब्रजराज सिंह ने चुनाव काढ़ने के लिए पद सीट छोड़ दी ताकि वे उस सीट से लड़कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने रहें।

उप चुनाव हुए और ये उप चुनाव उनके लिए एक बहुत कड़े मुकाबले के लिए हुए थे जब उनके सामने एक ऐसी उमीदवार थी जिसकी लोकप्रियता भी कम नहीं थी उसका नाम रानी राजेंद्र कुमारी था जो एक निर्दलीय उमीदवार के रूप में इलेक्शन लड़ी थी। रानी राजेंद्र कुमारी भी आजादी की लड़ाई और सौर्य के लिए जानी जाती थी। ये मुकाबला काफी नजदीकी रहा था।

पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता को मोरार जी देसाई के वक्त छोड़ा था मंत्री पद | Former Chief Minister Chandrabhanu Gupta left ministry at the time of Morarji Desai

1977 की आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी की नीतियों से सभी नेता नाराज थे और इन्हीं करने से कुछ राजनैतिक दिग्जों ने अलग पार्टी का निर्माण भी कर लिया था ,चौधरी चरण सिंह और मोरार जी देसाई उनमे में से थे। जब मोरार जी देसाई 1977 में भारत के प्रधानमंत्री बने थे तो उन्हें मोरार जी देसाई ने मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए कहा था पर उन्होंने अपने स्वाथ्य का खुलासा देते हुए मंत्रिमंडल पद के लिए इंकार कर दिया था।

कैसे और कब हुई थी  यूपी के दूसरे सीएम चंद्र भानु गुप्ता की मृत्यु :-

उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री जब 78 साल के थे तो उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया था और उनकी सेहत ख़राब हो गयी थी शायद इन्ही कारणों से वे राजनैतिक जवान त्यागना चाहते थे। 11 मार्च 1980 में पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्‍ता की 78 साल की उम्र में मृत्यु हो गई।




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