नौवें राष्ट्रपति थे शंकर दयाल शर्मा जानिए उनके जीवन परिचय के बारे में | Shankar Dayal Sharma was the ninth President, know about Shankar Dayal Sharma biography in Hindi
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा जीवनी : जन्म,परिवार, शिक्षा, आज़ादी में योगदान,राजनैतिक कॅरियर,राज्यपाल कॅरियर,राष्ट्रपति कार्यकाल, अवार्ड्स, मृत्यु, कविता
शंकर दयाल शर्मा शार्ट बायोग्राफी | Short Biography in Hindi
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पूरा नाम |
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा |
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जन्म तारीख |
19 अगस्त सन 1918 |
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जन्म स्थान |
भोपाल, मध्यप्रदेश, भारत |
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पिता का नाम |
खुशीलाल शर्मा |
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माता का नाम |
सुभद्रा शर्मा |
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पत्नी का नाम |
विमला शर्मा |
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कुल बच्चे |
2 बेटे, 1 बेटी |
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बेटों का नाम |
असतोष दयाल शर्मा और दीन
दयाल शर्मा |
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बेटी का नाम |
गीतांजलि माकन |
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राजनैतिक पार्टी |
भारतीय राष्ट्रीय
कांग्रेस |
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उप राष्ट्र पति कार्यकाल |
अवधि 7 सितम्बर 1987 से 24 सितम्बर, 1992 तक 243 दिन |
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राष्ट्रपति कार्यकाल
अवधि |
पांच साल, 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक |
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मृत्यु तारीख |
26 दिसम्बर सन 1999 |
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मृत्यु स्थान |
दिल्ली |
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समाधि
स्थल का नाम |
कर्मभूमि |
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मृत्यु वक्त उम्र |
80 साल, 8 महीने, 7 दिन |
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा का जन्म और परिवार | Birth and Family of Dr. Shankar Dayal Sharma
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा का जन्म का जन्म 19 अगस्त सन 1918 को आमोन नामक गाँव में हुआ था उस वक्त भोपाल एक रियासत थी और मद्रास प्रेसीडेंसी के अधीन आती थी। उनके पिता जी का नाम खशी लाल शर्मा थे जो एक हिन्दू परिवार से सबंध रखते थे और अपने अच्छे आचरण के लिए जाने जाते थे। उनकी माता जी का नाम सुभद्रा शर्मा था जो एक कुशल गृहिणी थी।उनकी पत्नी का नाम विमला शर्मा था जो उनकी दूसरी पत्नी थी। शंकर दिल शर्मा के तीन बच्चे हुए जिनमे एक लड़की जिसका नाम गीतांजलि माकन है और दो बेटे हुए जिनका नाम असतोष दयाल शर्मा और दीन दयाल शर्मा है। उनकी पत्नी विमला शर्मा 1985 में गए रये सेन विधानसभा क्षेत्र से विधायक रही हैं और 16 अगस्त 2020 को दिल्ली में उनका उनका निधन हो गया था जब उनकी अम्र 93 वर्ष की थी।
डॉक्टर शर्मा की शिक्षा का सफर और विद्यार्थी जीवन | Dr. Sharma's education journey and student life
डॉक्टर शर्मा की शिक्षा दीक्षा की प्रारंभिक शिक्षा सेंट जान्स कॉलेज आगरा से शुरू हुई। आगे की शिक्षा उनकी लखनऊ विश्वविद्यालय से हुई। अपनी B.A की शिक्षा के लिए उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत विषय को चुना। उन्होंने M.A की डिग्री भी लखनऊ विश्वद्यालय से की। उनका लखनऊ विश्व विद्यालय का पढ़ाई का सफर मेधावी रहा और उन्होंने M.A की डिग्री प्रथम स्थान से की। जब वे B.A कर रहे थे तो उन्होंने लखनऊ विश्विद्यालय के लिए समाज सेवा का काम भी किया था इसके लिए लखनऊ विश्व विद्यालय ने उन्हें चक्रवर्ती अवार्ड से नवाजा था।उनके पिता जी इच्छा थी कि वे एक सफल वकील बने इसलिए उन्होंने लॉ की पढ़ाई के लिए केम्ब्रिज में दाखिला लिया और वहां से लॉ की शिक्षा हासिल की। लॉ की शिक्षा को आगे जारी रखते हुए उन्होंने केंब्रिज से पी एच डी की डिग्री प्रथम स्थान में हासिल की। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने लंदन में लिंकन इन और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भाग लिया।
डॉक्टर शर्मा ने इलाहाबाद में अपने छात्र सफर में पढ़ाई के साथ खेल कूद को भी अपना विषय बनाया था। उन्होने विद्यार्थी जीवन में तैराकी, एक अच्छे एथलीट में भाग लिया। अपनी कानून की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने कानूनी अभ्यास 1940 में लखनऊ विषवद्यालय से शुरू किया।
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा का स्वतंत्रता, और स्वतंत्रता बाद योगदान | Dr. Shankar Dayal Sharma's Independence, and Post-Independence Contribution
इसमें कोई भी दो राय नहीं है कि उन्होंने वे अच्छी शिक्षा के साथ - साथ भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले गुलाटी भी थे। जब वे कानून की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उसी वक्त उन्होंने आजादी की लड़ाई के लिए अपना पहला कदम रख दिया था। अगर आजादी के लिए उनके संघर्ष की बात करें तो जब देश में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चल रहा था वे उम्र में छोटे थे क्यकि की उनका जन्म 1918 में हुआ था। पर उन्होंने 1942 भारत छोडो आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।भारत की आजादी के बाद शंकर दियाल शर्मा ने भारत की रियासतों को संगठित करने में योगदान दिया और शंकर दयाल शर्मा ने नवाब के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया और 23 जनवरी, 1949 को नवाब ने सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने के लिए उन्हें 8 महीने की अवधि के लिए कैद कर लिया। 30 अप्रैल, 1949 को नवाब ने उन्हें रिहा कर दिया गया।
डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा का राजनीतिक सफर | Political Journey of Dr. Shankar Dayal Sharma
1952 में 34 साल की उम्र में शंकर दयाल शर्मा भोपाल के मुख्यमंत्री बने। उस वक्त की राजनीति में ये इतिहास में पहली बार था कि वे सबसे युवा मुख्यमंत्री थे। भोपाल का विलय किया गया और मध्य प्रदेश राज्य बना जिसकी राजधानी भोपाल ही रखी गई। भोपाल का विलय 1956 में हुआ और तब तक वे भोपाल के मुख्य मंत्री ही रहे।1960 में उन्होंने कांग्रेस (इ) पार्टी के लिए काम किया इस काम के लिए उन्हें 1974 में अपनी केबिनेट में शामिल कर लिया और वे 1974 से 1977 तक तीन साल के लिए कांग्रेस पार्टी (इ) में केबिनेट मंत्री भी रहे।
डॉक्टर शंकर दयाल का राज्य पाल का सफर | Dr. Shankar Dayal's to the Governors)
1980 से 1984 तक वे इंदिरा गाँधी की कांग्रेस सरकार में मंत्रिमंडल के सदस्य रहे। पर 1984 में उन्हें आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य करना शुरू किया। उनके जीवन में का घटना हुई जब वे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के रूप में काम कर रहे थे, हम सभी जानते हैं उस वक्त पंजाब में खालिस्तान अलगाव वादियों का पंजाब में खलिस्तान के लिए लड़ाई पुरे जोरों पर थी। घटना ये हुई थी कि उनकी बेटी गीतांजलि माकन और दामाद ललित माकन की 31 जुलाई 1985 को सिख अलगाववादियों ने हत्या कर दी थी। उनके दामाद उस वक्त एक सांसद थे।वर्ष 1985 में, उन्होंने आंध्र प्रदेश राज्य छोड़ दिया और भारत सरकार और सिख उग्रवादियों के बीच हिंसक झड़पों के दौरान पंजाब राज्य को इसके राज्यपाल के रूप में सेवा देना शुरू कर दिया। 1986 में, उन्होंने पंजाब छोड़ दिया और 1987 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य करना शुरू किया।
डॉक्टर शंकर दयाल का उप - राष्ट्रपति का कॅरिअर | Dr. Shankar Dayal's Vice President's Career
1986 में पंजाब छोड़ने के बाद उन्हें 1987 में भारत के उपराष्टपति के रूप में नियुक्त किया गया। जब उन्होंने उपराष्ट्रपति के पद की शपथ ग्रहण की वे भारत के आठवें उप - राष्ट्रप्रति बने। उनके उप - राष्ट्रपति के कार्यकाल में देश के प्रधान मंत्री राजीव गाँधी और वी पी सिंह थे। जब वे उप राष्ट्रपति थे तो देश के राष्ट्रपति आर वेंकटरमन थे। उन्होंने देश के उपराष्टपति रहते हुए भी कई सराहनीय काम किये। डॉक्टर शंकर दयाल भारत के उप - राष्टपति पद पर 7 सितम्बर 1987 से 24 सितम्बर 1992 तक 243 दिन तक कार्यरत रहे।
डॉक्टर शंकर दयाल का राष्ट्रपति का कॅरिअर और कार्यकाल | Dr. Shankar Dayal's Presidential Career)
डॉक्टर शंकर दयाल ने वर्ष 1992 में देश के राष्ट्रपति का पद संभाला। 1992 में वे देश के नौवें राष्ट्रपति बने। नौवें राष्ट्रपति के रूप में जब वे काम कर रहे थे तो उन्होंने उस वक्त के चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया जिनमे पी.वी. नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एच.डी. देवेगौड़ा और आई के गुजराल के नाम शामिल हैं। उन्होंने देश के नौवें राष्टपति के रूप में एक मेधावी और अच्छी छवि वाले राष्ट्र पति का काम किया। डॉक्टर शंकर दयाल 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक पांच साल के लये देश के राष्ट्रपति रहे।डॉ शंकर दयाल शर्मा को दिए गए ये अवार्ड और सम्मान | Dr. Shankar dayal sharma award
सृन्गेरी के शंकराचार्य ने एक अच्छी छवि के लिए डॉ शंकर दयाल शर्मा को “राष्ट्र रत्नम” उपाधि से नवाजा था। जब वे वकील थे और इंटरनेशनल बार एसोसिएशन में सदस्य थे उन्हें लॉ की पढ़ाई के लिए और दिए जाने वाले योगदान के लिए ‘दी लिविंग लीजेंड ऑफ़ लॉ’ का सम्मान दिया गया था। जब वे केंब्रिज में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तो उन्हें टैगोर सोसायटी तथा कैम्ब्रिज मजलिस का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
इसी विश्व विद्यालय में उन्हें मानद "डॉक्टर ऑफ़ ला" की डिग्री दे कर सम्मानित किया था। इसके इलावा डॉ शंकर को देश के कई बड़े कॉलेज के द्वारा डोक्टरेट की उपाधि भी दी गई और गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया।
कैसे और कब हुई थी डॉक्टर शकंर दयाल की मृत्यु | Dr. Shankar Dayal's Death
जब वे राष्ट्रपति के पद पर आसीन थे उन्हें स्वस्थ्य संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 1993 से 1999 तक का उनका स्वास्थ्य खराब रहता था। 26 दिसंबर 1999 को उन्हें दिल का डोरा पड़ा और देश के आठवें उपराष्ट्रपति और नौवें राष्ट्रपति का निधन हो गया। उनका दाह संस्कार दिल्ली में हिन्दू रस्मों के अनुसार किया गया। आज भी देश के नेताओं द्वारा उनकी पुण्य तिथि पर उन्हें दिल्ली के विजय घाट में याद किया जाता है। देश और हम उन्हें और उनके कामों को हमेशा नमन करते हैं।
डॉ शंकर दयाल शर्मा एक कवि भी थे जिन्होंने 1970 में एक बहुत अच्छी कविता लिखी थी।
Poem by Sankar Dyal Shrma in Hindi | शंकर दयाल शर्मा की कविता
“अमल की किताब थी।
दुआ की किताब बना दिया।
समझने की किताब थी।
पढ़ने की किताब बना दिया।
जिंदाओं का दस्तूर था।
मरदों का मंसूर बना दिया।
जो इल्म की किताब थी।
उसे ला इल्मों के हाथ थामा दिया।
तस्कीर-ए-कायनात का दर्स देने आई थी।
सिर्फ मदरसों का निसाब बना दिया।
मुर्दा मुमालिक को जिंदा करने आई थी।
मुर्दों को बख्शवने प्रति लगा दिया।
ऐ मुस्लिमीन ये तुम ने किया किया ?”
उत्तर :- शंकर दयाल शर्मा का जन्म मध्यप्रदेश में हुआ था।
उत्तर :-शंकर दयाल शर्मा इंदिरा गाँधी के शासनकाल आंध्रप्रदेश के राज्यपाल नियुक्त किये गए थे।
उत्तर :- सन 1995 में जब शंकर दयाल शर्मा भारत के राष्ट्रपति थे उन्होंने हिन्दू धर्म के एक प्रसिद्ध मंदिर को देश के लिए समर्पित किया था जिसका नाम सोमनाथ मंदिर था।
उत्तर : आर वेंकटरमन, शंकर दयाल शर्मा से पहले भारत के राष्ट्रपति थे।
उत्तर :- शंकर दयाल शर्मा भारत के नौवें नंबर के राष्ट्रपति थे।
उत्तर :-केआर नारायणन शंकर दयाल शर्मा के बाद राष्ट्रपति बने।
उत्तर :- सुप्रीम कोर्ट के उस वक्त के चीफ जस्टिस एमएच कनिया ने उन्हें शपथ ग्रहण करवाई थी।
उत्तर :- जब शंकर दयाल शर्मा राष्ट्रपति थे तो के आर नारायणन उप राष्ट्रपति थे।
उत्तर : शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपति रहते चार प्रधानमंत्री बने थे, पीवी नरसिम्हा राव,अटल बिहारी वाजपेई, एचडी देवगौड़ा,इंद्रकुमार गुजराल।
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